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    मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पर्यटन स्थल

    अमृतधारा जलप्रपात:

    अमृतधारा जलप्रपात एम.सी.बी. जिले के मुख्यालय मनेंद्रगढ़ से 26 किमी दूर हसदेव नदी पर स्थित है। नदी का पानी 90 फीट की ऊंचाई से गिरता है। इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण पानी दूध के समान दिखाई पड़ता है। वर्षा ऋतु में यह दृश्य और भी विहंगम हो जाता है। यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर है और महाशिवरात्रि के अवसर पर मेला लगता है। इस मेले का प्रारंभ तत्कालीन रूलर चीफ स्व. रामानुज प्रताप सिंहदेव ने 1935 में किया था। नवीन एम.सी.बी. जिले के गठन (सन् 2022) के बाद जिला प्रशासन द्वारा “अमृतधारा महोत्सव” का आयोजन किया जाता है। यह संभाग का प्रमुख जलप्रपात है।

    रमदहा जलप्रपात:

    जिला मुख्यालय से इसकी दूरी 135 किमी है। जनकपुर विकासखंड के बेनीपुरा ग्राम में बनास नदी पर रमदहा जलप्रपात स्थित है। नदी का पानी लगभग 70-80 फीट की ऊंचाई से गिरता है। श्यामवर्णीय चट्टानों से घिरा यह जलप्रपात पिकनिक के मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करता है।

    च्युल जलप्रपात:

    जिला मुख्यालय से 125 किमी दूर जनकपुर विकासखंड के ग्राम ज्यूल में दौना नदी का पानी लगभग 25 फीट की ऊंचाई से गिरता है। वर्षा ऋतु में यह प्रपात अत्यंत सुंदर हो जाता है।

    कर्मघोघा जलप्रपात:

    जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर स्थित हसिया नदी का पानी लगभग 60-70 फीट की ऊंचाई से गिरता है। यहाँ कर्मघोधेश्वर धाम है, जिसमें भगवान शिव व देवी की प्रतिमा है। यह प्राकृतिक जलप्रपात के साथ धार्मिक आस्था का केंद्र भी है।

    राष्ट्रीय मरीन गोंडवाना फॉसिल्स पार्क :

    जिला मुख्यालय से मात्र 02 किमी की दूरी पर हसदेव नदी तट पर एशिया का सबसे बड़ा फॉसिल्स पार्क स्थित है। इसकी खोज कोयला व्यापारी एस.के. घोष द्वारा की गई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यहाँ पाए गए जीवाश्म (Fossils) 29 करोड़ वर्ष प्राचीन हैं। यहाँ एक इंटरप्रिटेशन बिल्डिंग भी बनाई गई है जहाँ जीवाश्मों की जानकारी दी गई है।

    सिद्धबाबा धाम :

    एम.सी.बी. जिले का मुकुट कहा जाने वाला सिद्धबाबा पहाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग 43 के पास स्थित है। यहाँ प्रसिद्ध शिव मंदिर को केदारनाथ धाम की तर्ज पर निर्मित कराया गया है। रात्रि में प्रकाश व्यवस्था के कारण इसकी सुंदरता देखते ही बनती है।

    चांगदेवी मंदिर:

    जिला मुख्यालय से 120 किमी दूर स्थित यह मंदिर चांगभखार और कोरिया रियासत की कुलदेवी का है। यहाँ देवी की प्रतिमा के स्थान पर पत्थर की एक शिला है, जो कलचुरी शिल्पकला का प्रतीक मानी जाती है।

    सीतामढ़ी हरचौका:

    जनकपुर विकासखंड में स्थित यह स्थान श्रीराम वनगमन पथ का हिस्सा है। माना जाता है कि वनवास काल में भगवान श्रीराम ने मवई नदी को पार कर छत्तीसगढ़ में पहला कदम यहीं रखा था। यहाँ गुफा में 17 कक्ष हैं, जिनमें 12 में शिवलिंग स्थापित हैं। इसे ‘सीता की रसोई’ के नाम से भी जाना जाता है।

    घघरा का प्राचीन शिव मंदिर:

    यह मंदिर 10वीं शताब्दी की पुरातात्विक वास्तुकला का जीवंत उदाहरण है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसे बनाने में किसी जोड़ाई (Cement/Mortar) का उपयोग नहीं किया गया है; पत्थरों को एक के ऊपर एक रखकर बनाया गया है।

    जटाशंकरी गुफा:

    मनेंद्रगढ़ विकासखंड के ग्राम बैरागी से 12 किमी दूर घने जंगल में यह गुफा स्थित है। गुफा के अंदर शिवलिंग है जिसके ऊपर कुदरती रूप से जल की बूंदें गिरती रहती हैं।

    महामाया मंदिर (चनवारीडांड):

    जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर स्थित यह मंदिर इस क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसे सैकड़ों वर्ष पूर्व तत्कालीन जमींदार परिवार द्वारा स्थापित किया गया था।

    शैल चित्र:

    जनकपुर विकासखंड के पहाड़ों पर हजारों वर्ष प्राचीन शैल चित्र मिलते हैं। तिलौली, आरा, भंवरखोह आदि स्थानों पर बैल, हिरण, हल और स्वास्तिक जैसी विभिन्न मानव आकृतियों के चित्र उकेरे गए हैं।