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    इतिहास

    प्राचीन उत्पत्ति और प्रारंभिक राजवंश

    ईसा पूर्व पूर्व:
    पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि सर्गुजा क्षेत्र में ईसा पूर्व से बहुत पहले मानव उपस्थिति थी, और प्रारंभिक बस्तियां नंदा राजवंश से जुड़ी हुई थीं।

    मौर्य काल:
    मौर्य साम्राज्य के आगमन से पहले यह क्षेत्र नंदा साम्राज्य के नियंत्रण में था, जो इसकी रणनीतिक महत्ता को दर्शाता है।

    रियासती युग

    राज गोंड शासक:
    इस क्षेत्र पर शक्तिशाली राज गोंड राजाओं का शासन था, जिनमें से सरगुजा महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा बिजय सिंह द्वारा करवाया गया था, जो जटिल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

    सरगुजा राज्य:
    सरगुजा एक रियासत के रूप में अस्तित्व में था, जिसके अंतिम शासक, महाराजा रामानुज सरन सिंह देव ने 1 जनवरी, 1948 को भारतीय संघ में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

    छत्तीसगढ़ में एकीकरण

    स्वतंत्रता के बाद:
    भारत की स्वतंत्रता के बाद, सरगुजा राज्य भारतीय संघ में एकीकृत हो गया।

    छत्तीसगढ़ का गठन (2000):
    1 नवंबर, 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर बने नए छत्तीसगढ़ राज्य में सरगुजा क्षेत्र भी शामिल हो गया।

    आज सरगुजा डिवीजन

    प्रशासनिक संरचना:
    सरगुजा अब एक प्रशासनिक प्रभाग है, जिसमें छह जिले शामिल हैं: सरगुजा, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी)।

    सांस्कृतिक पहचान:
    यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान को बरकरार रखता है, यहाँ सुरगुजिया बोली बोली जाती है, जो इसकी गहरी ऐतिहासिक जड़ों को दर्शाती है।