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    कोरिया के पर्यटन स्थल

    झुमका वाटर टूरिज्म (बैकुण्ठपुर):

    जिला मुख्यालय कोरिया से 3 कि.मी. दूर ओड़गी ग्राम में झुमका जलाशय स्थित है जहा झुमका वाटर टुरिज्म सोसायटी का गठन कर पर्यटन के विकास हेतु बोट क्लब जिसमे स्पिडबोट पैडल वोट एवं हाउस बोट का संचालन हो रहा है पास ही पार्किंग, फिश एक्वेरियम, कैफेटेरिया एवं मिनि थियेटर उपलब्ध है।

    घुनघुट्टा जलाशय ट्री हाउस कार्टेज अमहर सोनहत:

    जिला मुख्यालय कोरिया से 38 की.मि. दूर सोनहत विकास खण्ड के ग्राम अमहर के पास चारो ओर सघन साल वृक्षों एवं पहाड़ियो के मध्य घुनघुट्टा जलाशय स्थित है परम शांति दायक स्थल है जहॉं पर पर्यटको को रूकने हेतु कार्टेज ट्री हाउस रेस्टोरेंट की व्यवस्था की गई है।

    तमोर पिंगला गुरूघासीदास नेशनल पार्क सोनहत रामगढ़:

    जिला मुख्यालय कोरिया से 36 की.मि. दूर ग्राम मंेड्रा के पास उक्त नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार है, जो 70 कि.मी. दूर ग्राम आनंदपुर गोयनी तक फैला है, उक्त नेशनल पार्क में सुदर-सुंदर प्राकृतिक स्थल, ऐतेहासिक स्थल के साथ जंगली जानवर शेर,बाघ,नीलगाय,वनभैसा,वनसुअर,बारहसिंगा, चितल आदी स्वच्छन्द विचरते है जहां गर्मी ठंडी मेे घुमने लायक है।

     रामधारा जलप्रपात तन्जरा, सोनहत:

     

    जिला मुख्यालय कोरिया से 42 कि.मी. दूर सोनहत विकास खण्ड के ग्राम कैलाशपुर से केशगवां होते हुए तन्जरा पहूंचा जाता है जहॉ से 2 कि.मी. दूर अंदर जंगल में हनुमानधारा, रामधारा तथा लक्ष्मणधारा तीन जलप्रपात क्रमशः है पास ही सीताकुण्ड भी है। सुंदर प्राकृतिक स्थल बारहमासी बराबर पानी बहने वाला जलप्रपात है, भगवान राम का वनवास काल में वनगमन क्षेत्र रहा है। राज्य स्तर के पर्यटक स्थल पर आते है।

    गौरघाट जलप्रपात बसेर सोनहत:

    जिला मुख्यालय कोरिया से 40 कि.मी. दूर सोनहत विकास खण्ड के कठगोड़ी दामुज तर्रा एवं बसेर के बीच से जंगल मे दाहिने तरफ 7 कि.मी. अंदर हसदो नदी पर चारो तरफ सुंदर जंगलो के मध्य गौरघाट जलप्रपात है जो सुंदर पर्यटन स्थल है जहॉ पर राज्य स्तर से पर्यटक लोग आते है।

    वातानूकुलित प्राकृतिक स्थल अकुरीनाला (अमुरीनाला) बंसीपुर, सोनहत:

    जिला मुख्यालय कोरिया से 60 कि.मी. दूर सोनहत भैसवार अकलासरई कीशोरी से बंशीपुर पहुंचा जाता है जहॉ से 2 कि.मी. अंदर जंगल मे अकुरीनाला पर जलप्रपात है पास ही चट्टान गुफा का रूप लेती है लेकिन ऊपर दोनो पार की चट्टाने सटी हुई नही है। एक तरफ से चट्टान से बुंद-बुंद पानी टपकता रहता है गर्मी के दिनो में भी उक्त स्थल पर ठंडा बना रहता है जिससे इसे वातानुकूलित स्थल कहते है छ.ग. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश महोदय का दौरा भी यहॉं हो चुका है।

    छुरीगढ़धाम मोदीपारा बड़गांव बैकुण्ठपुर :

    जिला मुख्यालय कोरिया से 15 कि.मी. दूर मोदीपारा बड़गांव गांव से लगा हुआ छुरीगढ़धाम (पहाड़) स्थित है जहॉ पर प्राचीन शिव मंदीर एवं पूरे पहाड़ में कई हजार बेल के पेड़ उगे हुए है, साथ ही अन्य प्रकार के औषधि पौधे उपलब्ध है, यहॉ सावन मे जलाभिषेक का कार्यक्रम होता है।

    देवगढ़ धाम नानभान चामट पहाड़ 84 बाबा पटना :

    जिला मुख्यालय से 22 कि.मी. दूर पटना से टेमरी करहीयाखांड नानभान गॉव के पास प्राचीन पुरातात्वीक स्थल देवगढ़ धाम स्थित है। जहॉ प्रतिवर्ष मेला लगता है दूर-दूर के पर्यटक घुमने एवं दर्शन करने आते है पटना 84 का नाम इसी 84 बाबा से पड़ा है।

    गांगीरानी गुफा नटवाही रामगढ़ सोनहत:

    जिला मुख्यालय से 70 कि.मी. दूरी पर सोनहत से रामगढ़ एवं नटवाही ग्राम के पास गागीरानी देवी मॉ का प्राचीन पत्थर को काटकर बनाई गयी गुफा है जहॉ 1936 से कोरिया के राजा रामानुजप्रताप सिंह देव द्वारा पंडित श्री श्याम करण से पूजा कराकर मेला का शुरूआत दोनो नवरात्री मे किया गया जो मेला आज तक लग रहा है। मुख्यमंत्री जी डॅा. रमन सिंह का आगमन इस स्थान पर हो चुका है।

    ओमतीर्थ ओमकारेश्वर धाम कैलाशपुर सोनहत :

    जिला मुख्यालय कोरिया से 26 कि.मी. दूर कैलाशपुर ग्राम सोनहत से पहले हसदो नदी के तट पर ओमतीर्थ ओमकारेश्वर धाम स्थित है, प्राकृतिक रूप से नदी की जलधारा से ओम की आकृति बना हुआ है, तीन नदीयों का त्रिवेणी संगम है एवं लोगो के द्वारा पूजित है 1999 से प्रतिवर्ष मकर सक्रांति का मेला लगता है।

    बालमगढ़ी (मेंद्रा):

    जिला मुख्यालय कोरिया से 50 की.मि. दूर सोनहत मेंड्रा होते हुए रामगढ़ मुख्य मार्ग से 5 कि.मी. अंदर बालमगढ़ी पहाड़ स्थित है जिस स्थान पर राजा बालम का गढ़ एवं राजधानी रहा है कोरिया राजा साहब रामानुज प्रताप सिंह देव का बंगला भी था पास ही उक्त पहाड़ी क्षेत्र से उत्तर की ओर चिल्ली ढोढ़ी से गोपद नदी नीकली है एवं दक्षिण की ओर से छ.ग. राज्य की उर्जा दायिनी हसदो नदी निकली है।

    सेन्दूरीगढ़ बदरा सोनहत :

    जिला मुख्यालय कोरिया से 45 की.मि. दूर सोनहत भैसवार होते हुए बदरा पहुंचा जाता है पहाड़ी पर पुराना गढ़ है पत्थरो का गेट आज भी मौजूद है पास ही राक पेंटीग एवं मॉ महामाया दुर्गा का स्थान है सुन्दर प्राकृतिक स्थल है।

    कोरिया महल बैकुण्ठपुर ,सोनहत :

    जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में 1901 से निर्मित राजधानी रही है जहॉं 1923 से 1941 के मध्य कोरिया महल बनाया गया जो कोरिया राजा का व्यक्तिगत संपति है। साथ ही उसके पूर्व का प्राचीन गढ़ी सोनहत मे स्थित है। साथ ही बैकुण्ठपुर मे प्राचीन राम जानकी मंदिर, प्रेमाबाग मंदिर एवं हनुमान मंदिर तथा प्रेमाकुण्ड देखने लायक है।

    जोगीबाबा धाम (केशगवा, सोनहत):

    जिला मुख्यालय कोरिया से 28 कि.मी. दूर सोनहत विकास खण्ड के ग्राम केशगवां से अन्दर जंगल मे 7वीं 8वीं शताब्दी का 24 वॉं जैन तीर्थंाकर के प्राचीन पत्थरो की मुर्ति है जो स्थानीय लोगो के द्वारा पूजित है तथा जवारा बोया जाता है एवं मेला लगता है।

    कोड़ेयागढ़ पहाड़ चिरमि पेटमा बचरापोड़ी बैकुण्ठपुर:

    प्राचिन राजाओ की राजधानी कोड़ेयागढ़ पहाड़ पर था कोड़ हुआ गढ़ होने के कारण कोड़ेया बोलते थे इस राज्य की विशेषता थी पारस पाथर खिना लगान तेला जान कोडे़या का निशान। प्राचीन काल मे कोड़ेया राज्य मे सालभर नागर जोतने के बाद बचे हुए खिना लोहा को लगान के रूप मे जमा किया जाता था पारस पत्थर होने के कारण उसे सोना मे बदल लिया जाता था। कोड़ेया को अंग्रेजी मे कोरिया लिखा जाने लगा इससे कोड़ेया के स्थाना पर कोरिया बन गया । बालमिक दुबे वनस्थली वाले से और जानकारी प्राप्त कर सकते है।