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    रामेश्वर गहिरा गुरूजी

    रामेश्वर गहिरा गुरूजी :- सरगुजा अंचल के संत रामेश्वर गहिरा गुरू जी ने वनवासीयों में चेतना व विकास लाने का प्रयास किया। गुरू जी का जन्म घनघोर वर्षा श्रावण मास में सन् 1905 को रात्रि में हुआ था। वे वनवासी कंवर पैंकरा जाति में पैदा हुये थे, गहिरा ग्राम छत्तीसगढ़ में दुर्गम पहाड़ियों में बसा हुआ ग्राम है। गुरूजी का पूरा नाम रामेश्वर कंवर था। गहिरा ग्राम में जन्म लेने के कारण इन्हें गहिरा गुरू के नाम से जाना जाता है। रामेश्वर गहिरा गुरूजी ने जीवन भर वनवासियों के हितों एवं संरक्षण के लिए कार्य करते रहे। इन्होनें स्वच्छता, सामूहिक उन्नत खेती, व्यसन मुक्त समाज की स्थापना मांसाहार मुक्त समाज की स्थापना, गौ पालन, शिष्टाचार की परम्परा, तुलसी पौधारोपण, मंदीरों का निर्माण, आवासीय शिक्षा पर जोर देने वाले पहले वनवासी ऋषि रहे है।
    सन् 1943 से गहिरा गुरू के नाम से प्रसिद्ध हुए। 1953 में कैलाश गुफा आश्रम की स्थापना तथा सन् 1953 में संस्कृत विद्यालय की स्थापना की गई। सन् 1973-74 में ग्राम वासियों के साथ मिलकर बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाने में महत्वपूर्ण योगदान के साथ-साथ सन् 1943 से मृत्यु पर्यन्त तक समाज सेवा तथा सनातन धर्म की स्थापना कर, आदिवासियों में धार्मिक विचारधारा एवं उत्तम आचरण बनाने में महत्वपूर्ण योगदान इनके द्वारा दिया गया।
    1986-87 में प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत एवं सम्मानित हुए थे। सन् 1990-91 में प्राथमिक शाला वनवासी कोरवा सेवा आश्रम की स्थापना कर प्राथमिक शिक्षा का बढ़ावा देने का पुनित कार्य गहिरा गुरू जी के द्वारा किया गया।
    गहिरा गुरू द्वारा संचालित आश्रमों में श्रीकोट (अम्बिकापुर में), समर बहार (रायगढ़ में), गहिरा ग्राम व लैलूंगा, इन सभी आश्रमों में संस्कृत शिक्षा दी जाती है, जो आदिवासी समाज के लिए उनकी सबसे बड़ी देन है। 21 नवम्बर 1996 में गहिरा ग्राम में उनकी मृत्यु उपरांत उनके बच्चों के द्वारा आश्रमों का संचालन किया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए सरगुजा विश्वविद्यालय का नामकरण संत गहिरा गुरू के नाम से करते हुये उच्च शिक्षा का व्यापक प्रचार-प्रसार का कार्य किया जा रहा है।

    संपर्क विवरण

    पता: सबरबार (समरबहार), अंबिकापुर से लगभग 60 किमी पूर्व, तहसील-बगीचा, जिला जशपुर, छत्तीसगढ़।

    रामेश्वर गहिरा गुरूजी

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