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    सूरजपुर के पर्यटन स्थल

    कुदरगढ़ धाम:

    जिलामुख्यालय से लगभग 45 कि0मी0 की दूरीपरकुदरगढ़ पर्वतमेंकुदरगढ़ी माता की प्राचीनमंदिरस्थापितहै, जो 17वीं शताब्दी के खैरबारराजाबालन्दपहाडियों से जुडीहुईहै, कुदरगढी माता की प्राचीनमूर्ति के साथ-साथसूरज धारा,नागडबरा,विजयकुण्ड एवंपुराना धामप्रमुख स्थलहै। यहॉंचैत्र नवरात्रि मेंमेलालगताहै।कुदरगढ़ माता का प्रथमपूजाचेरवाजनजाति के बैगापरिवार एवं राज परिवार के द्वाराकियाजाताहै।मंदिर के समीपबकरे की बलिदीजातीहै एवंनिकलेरक्तकोरक्तकुण्डमेंडालाजाताहैकिन्तुरक्तकुण्डकभीभरतानहींहै।कुदरगढ़ी माताबाघमेंसवारकियेहुए है।इसकेकारणमाताकोबागेश्वरीदेवी के रूपमेंभीजानतेहै।वर्तमानमंदिर से 01 किलोमीटर की दुरीपरपुराने धाममेंप्राचीनप्रतिमातथाआसपासकई धार्मिकस्थलहै।जहांआजभी श्रद्वालूबड़ेहीआस्था के साथमाता के दोनों धामपहुंचकरपूजा-पाठकरतेहै।

    रकसगंडा जलप्रपात:

    सूरजपुरजिलामुख्यालय से 110 कि0मी0 नवगईगांवके समीपरिहन्दनदीपरसंभाग का सबसेगहरा जलप्रपात स्थितहै।

    सीतालेखनी/लक्ष्मनपांव:

    सूरजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 75 कि0मी0 की दूरी पर जेल्हाग्राम में मुख्य मार्ग के समीप सीतालेखनी पहाड़ एवंलक्ष्मनपांव का पवित्र स्थलहै, जो 9-10वीं शताब्दी के आसपास मानी जातीहै।

    बांक :

    जिला मुख्यालय से लगभग 56 कि0मी0 की दूरी पर रिहन्द नदी के तट पर बांक जलकुण्ड एक प्रमुख प्राकृतिक केन्द्र स्थित है।

    बैजन पाट पहाड़:

    सूरजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 110 कि0मी0 की
    दूरी पर बैजन पाट की पहाडियों में 14-15वीं शताब्दी के आसपास की दुर्लभ वॉंल
    पेंटिंग चित्रित है।

    सारासोर:

    सूरजपुर जिला मुख्यालय से 42 कि0मी0 की दूरी पर रेड़ नदी के
    तट पर सारासोर एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप मंे अपनी पहचान बनाये हुये हैं,
    जो भगवान राम के वनगमन से जुडी हुई एक प्रमुख स्थल है।

    खोपा दवेता:

    जिला मुख्यालय से लगभग 17 कि0मी0 की दूरी पर खोपा
    देव की प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जहॉं खोपा देव के साथ खोपा दाई, बूढ़ी माई
    जलहल देव की मूर्ति लगभग सौ साल पूर्व से स्थापित है। जिो दैत्य राज या दानव
    बंकासुर जिन्हें खोपा देव के नाम से पूजा करते है। लोग अपनी मान्यताओं को पूरा
    करने के लिये बकरे की बली देते हैं।

    लक्ष्मन पाएन:

    जिला मुख्यालय से लगभग 56 कि0मी0 की दूरी पर प्रतापपुर विकासखण्ड़ अन्तर्गत मरहटा ग्राम मं लक्ष्मन पाएन स्थल है, जो भगवान श्रीराम के
    वनगमन से जुडी हुई स्थल बताई जाती है।

    कर्क रेखाः

    जिला मुख्यालय से लगभग 62 कि0मी0 की दूरी पर लटोरी
    बनारस मार्ग के भैसामुण्डा नदी के समीप कर्क रेखा गुजरती है, जो प्रमुख आकर्षण
    का केन्द्र है।

    शिवपुर तुर्रा:

    सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखण्ड़ मुख्यालय के 5 कि0मी0
    की दूरी पर भगवान महादेव जी का प्राचीन मन्दिर स्थापित है, जहॉं पत्थरों के बीच
    पानी की अनवरत धारा शिवलिंग के ऊपर गिर रही है।

    तमोर पिंगला:

    जिले के प्रतापपुर विकासखण्ड़ अन्तर्गत तमोर पिंगला
    अभ्यारण है, जो प्राकृतिक दृष्टि से वनों से घिरा हुआ महत्वपूर्ण स्थल है। यहॉं हाथियों
    के पुर्नवास के लिए केन्द्र स्थापित किये गय े हैं।

    राष्ट्रपति भवन:

    सूरजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 31 कि0मी0 दूरी पर पण्डो नगर गांव में राष्ट्रपति भवन एक ऐतेहासिक स्थल है, यहॉं पर सन 1952 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉं0 राजेन्द्र प्रसाद जी का आगमन हुआ था, एवं रात्रि विश्राम किये थे।

    महामाया मन्दिर देवीपुर:

    जिला मुख्यालय से लगे ग्राम देवीपुर की पहाड़ी
    पर मॉं महामाया जी का मंदिर है जहां जनजातीय समाज के द्वारा चैत्र नवरात्रि के
    पावन अवसर पर ज्वार े बोकर तथा धार्मिक अनुष्ठान कर अपने खुशहाली, बढ़िया
    खेती तथा घर परिवार समाज, के सुख समृद्वि के लिये अपनी प्राचीन परम्पराओं के
    तहत् विविध धार्मिक क्रियाकलापों के माध्यम से देवी को प्रसन्न करते है। यहां चैत्र
    नवरात्रि एवं शारदीय नवरात्रि मंे भव्य मेला लगता है।

    कुमेली जल प्रपात:

    जिला मुख्यालय से लगभग 25 कि0मी0 की दूरी पर परशुरामपुर ग्राम के समीप कुमेली जलप्रपात स्थित है, जो सैर सपाटी के लिए एक प्रमुख स्थल के रूप में विख्यात है।

    केनपारा पर्यटन स्थल:

    सूरजपुर जिले के विश्रामपुर के समीप केनापारा
    ग्राम में ओपन काष्ट (खुली खदान) के अनुपयोगी पोखरी का एस0ई0सी0एल0 एवं
    जिला प्रशासन के सहयोग से पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है, जो
    जिले के लिये प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

    पहाड़ गांव पयर्टन स्थलः

    जिले के पहाड़गांव ग्राम में वन-विभाग के सहयोग से जल पर्यटन के रूप में विकसित किया गया है, जहॉं जिले के पर्यटन पहाड़गांव के प्राकृतिक स्थल में नौका विहार के लिये एवं प्री-वैडिंग सूट के लिये स्थल का चुनाव करते हैं।

    रामेश्वर नगर:

    सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विकासखण्ड अन्तर्गत रामेश्वर
    नगर ग्राम में एक प्राचीन मंदिर है, जो भगवान राम के वनगमन से जुडी हुई है।

    गढौतिया देवी धाम:

    सूरजपुर जिला मुख्यालय से लगभग 80 कि0मी0 की दूरी पर महोली ग्राम में गढौतिया पहाड़ी पर अति प्राचीन अष्ट भुजी गढ़ौतिया माता की मूर्ति स्थापित है।